Tuesday, 23 March 2021

बेशक

बेशक तेरी मेहफिल में रौनक आज भी होगी
पर मेरी मौजूदगी की बात ही अलग थी

बेशक तेरी वफ़ा के आज भी दीवाने होंगे कई
पर मेरी वफ़ादारी की बात ही अलग थी

बेशक तेरी नाव की दिशा बदल गयी होगी हवा के रूख से
पर मुझ खेवैये की बात ही अलग थी

बेशक तेरा वक़्त बदल गया होगा समय के साथ
पर तेरे मेरे वक़्त की बात ही अलग थी

बेशक ये ज़माना लाज़वाब होगा तेरा
पर मेरे वाले ज़माने की बात ही अलग थी

बेशक बहुतेरे होंगे तुझे समझने वाले तेरे इर्द गिर्द
पर मेरी समझदारी की बात ही अलग थी

बेशक ज़िंदगी गुज़र जायेगी अलग अलग रास्तों पे चलकर भी
पर साथ साथ चलने की बात ही अलग थी

बेशक ये नज़रिया मेरा है हमारे रिश्ते को देखने का
पर तुम्हारा नज़रिया भी काश यही होता तो बात ही अलग थी
अपूर्वा तिवारी


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