मारकर मुझे ठोकर तुम ढूँढ लो कहीं और सुकून,
मगर मुझसे बेहतर कहीं नहीं पाओगे तुम।
तुम्हारे झूठ और धोखों की फेहरिस्त है मेरे पास,
कोशिश कर लो मगर अपने अतीत से ज़्यादा दूर तलक भाग नहीं पाओगे तुम।
सच को देख आँखें मूँदी हैं मैंने और तुम्हारे चकमे को सच माना है,
एक उँगली उठा लो मुझपे, मगर बाकी चार उँगलियों से बच नहीं पाओगे तुम।
कदम कदम पे दूसरों का सहारा ढूँढते हो तुम,
जानती हूँ मेरी तरह अकेले ससम्मान जीवन नहीं बिता पाओगे तुम।
हरगिज़ माफ़ी के काबिल नहीं है कर्म तुम्हारा,
जब होश में आओगे, इस ज़िंदगी में पूरा प्रायश्चित भी नहीं कर पाओगे तुम।
अभी भाग लो जितना भागना है मेरी परछाई से भी,
एक वक़्त आएगा, कोशिश करोगे मगर मेरा दीदार भी नहीं कर पाओगे तुम।
अपने वज़ूद को इतना हल्का कर चुके हो,
कि मेरी नज़रों में अपनी कीमत को फिर नहीं उठा पाओगे तुम।
मेरे पीठ पीछे जो नकली माहौल बना रखा है तुमने,
मेरे सामने आकर नज़रे मिलाकर स्वीकार नहीं कर पाओगे तुम।
तुम्हारी खैरियत बनी रहे, ईश्वर से यह प्रार्थना है मेरी,
मगर मेरी सलामती का ज़िम्मा कभी नहीं उठा पाओगे तुम।
ये पंक्तियाँ पढ़कर उनका केवल मज़ाक बना सकते हो तुम,
खेद है मुझे, उनका अर्थ कभी नहीं समझ पाओगे तुम।
अपूर्वा तिवारी